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केवड़े की आख़िरी भट्टी
About this book
गंधावती में इत्र क़ानून है: गद्दी तभी वैध जब अभिषेक में राजगंध लगे। बूढ़े महाराज मृत्युशय्या पर हैं और नुस्ख़ा दो साल पहले जल चुका है। अट्ठाईस साल का अंजन, बाज़ार में 'नक़ली नाक' कहलाने वाला जालसाज़, जेल की जगह एक सौदा चुनता है: इकतालीस दिन में राजगंध की ऐसी नक़ल जो राज-नासिका शिरीषा को भी चकमा दे दे। शिरीषा हज़ार गंधों में एक झूठ पकड़ लेती है, पर अंजन के पास आते ही उसकी नाक बंद हो जाती है। भाप से भरे भट्टीघर में हर रात एक नई कसौटी है, और हर रात का झूठ पिछली रात से भारी। कोई तीसरा आदमी भी है, जिसे शिरीषा सूँघ सकती है, अंजन नहीं। घड़ी चल रही है।
Book details
- Genres:
- Spicy Romance, Fantasy
- Language:
- hi
- Published:
- 2026-10-23
- Content rating:
- PG