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सोनखेड़ पहेली मंडल
About this book
मालवा के छोटे-से क़स्बे सोनखेड़ में हर गुरुवार छपने वाले साप्ताहिक अख़बार का "पहेली कोना" बीस बरस से मास्टर जी बनाते आए थे। अगस्त 2024 में डाकघर की बेंच पर उनकी मौत के तीन दिन बाद अख़बार की तेईस वर्षीय कंपोज़िटर रिंकी सक्सेना को उनकी डाली आख़िरी चिट्ठी मिलती है: "पहेली अधूरी मत छपने देना। जवाब बीस साल पुराने हैं।" उसी रात मास्टर जी की पहेलियों की कॉपियाँ चोरी हो जाती हैं। लोगों के सामने बोलने से कतराने वाली रिंकी को पुराने हल करने वालों का साथ मिलता है—एक रिटायर्ड पोस्टमास्टरनी, एक ज़िद्दी छात्रा, एक बेरोज़गार वकील-शायर और उस चौकीदार का बेटा, जिस पर 2004 में पुस्तकालय के चंदे की चोरी का दाग़ लगा था। पुस्तकालय की ज़मीन की नीलामी में तीस दिन बचे हैं। और कोई नहीं चाहता कि आख़िरी पहेली छपे।
Book details
- Genres:
- Cozy Mystery, पत्रात्मक उपन्यास, छोटे क़स्बे का सामुदायिक नाटक
- Language:
- hi
- Published:
- 2026-11-03
- Content rating:
- PG-13