भूमिगत स्टेशन की रोबोट गौरैया

Original AI-generated book

भूमिगत स्टेशन की रोबोट गौरैया

About this book

तैरते महानगर आकाशपुरी की निचली परतों में रहने वाला दस वर्षीय आरव कहानियाँ गढ़ने में माहिर है—उड़ते पेड़, नाले की सोने की मछलियाँ, बादलों में छिपी रेलगाड़ी। मोहल्ले में कोई उसकी बात पर भरोसा नहीं करता, और यही उसकी सबसे बड़ी मुश्किल बनने वाली है। एक बरसाती दोपहर कबाड़ के ढेर में उसे एक टूटी रोबोट गौरैया मिलती है, जिसके पंखों पर पुराने उपनिवेश काल का नक्शा टिमटिमाता है। गौरैया जागती है और आरव को शहर के नीचे दबे एक परित्यक्त स्टेशन की ओर ले चलती है—वहाँ पुरानी पृथ्वी से आए खोज-यानों के अवशेष हैं, दीवारें पुरानी डायरियाँ दिखाती हैं, और गुरुत्वाकर्षण कहीं-कहीं उलटा बहता है। औजारों से भरी जेब रखने वाली उसकी सहेली मीरा साथ जुड़ती है, जो सच बोलने को सबसे बड़ा औजार मानती है। नगर परिषद 'प्रगति' के नाम पर नीचे की सुरंगें तोड़कर नए तैरते टावर खड़े करना चाहती है। पर सुरंगों के नीचे कुछ ऐसा है जिसे परिषद के नक्शे नहीं दिखाते। जैसे-जैसे आरव और मीरा गहरे उतरते हैं, आरव को समझ आता है कि उसकी सबसे ज़रूरी खोज सुनाने के लिए उसे पहले अपनी गढ़ी बातें एक-एक करके सुधारनी पड़ेंगी—वरना जब वह सच बोलेगा, कोई नहीं सुनेगा। यह कथा वर्षों बाद वयस्क आरव द्वारा अपनी छोटी भतीजी को एक पुरानी डायरी दिखाते हुए सुनाई जाती है, लेकिन मुख्य कहानी हमेशा छोटे आरव की आँखों और अधूरी यादों तक सीमित रहती है—जिससे पाठक कभी-कभी सच और कल्पना के बीच मीठी उलझन में पड़ जाता है। रोमांच, दोस्ती, मरम्मत के औजार और खोज का उत्साह—बिना किसी हिंसा के।

Book details

Genres:
Classic Sci Fi, Urban Fantasy, Middle Grade Adventure, Mystery
Language:
hi
Published:
2026-07-30
Content rating:
PG

Featured books

See all books in the bookstore