कोलकाता की छिपी जादुई डाकपेटी

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कोलकाता की छिपी जादुई डाकपेटी

About this book

मीरा राय, जो कभी कोलकाता के जादुई संतुलन की रक्षक थीं, एक भूल के कारण अपना पद और शक्तियाँ खो चुकी हैं। अब 48 वर्ष की आयु में एक छोटे से फ्लैट में एकाकी जीवन बिताते हुए, उन्हें एक पुरानी, जंग लगी जादुई डाकपेटी मिलती है। इस डाकपेटी में डाले गए उनके पत्र शहर से दूर रहने वाले 29 वर्षीय पूर्व पुस्तकालय कर्मचारी अरुण तक पहुँचते हैं। केवल पत्रों के इस रैखिक आदान-प्रदान के ज़रिए छह महीनों की अवधि में, मीरा और अरुण एक-दूसरे के अकेलेपन को दूर करते हैं। अरुण के शांत और विचारशील शब्दों से प्रेरित होकर, मीरा बिना किसी जादुई शक्ति के केवल सहानुभूति से अपने पड़ोसियों की मदद करने लगती है। जैसे-जैसे कोलकाता तेजी से बदलते शहरीकरण के कारण सामूहिक निराशा में डूबता है, मीरा को यह एहसास होता है कि उसकी पुरानी कृपा अब शब्दों और मौन उपस्थिति में बदल गई है। पत्रों की यह श्रृंखला न केवल शहर के सूक्ष्म संतुलन को फिर से स्थापित करती है, बल्कि अरुण को अपनी जड़ों की ओर लौटने का साहस भी देती है। यह कहानी शांति, स्वीकृति और आशा की एक सुखद यात्रा है।

Book details

Genres:
Healing Fiction, Urban Fantasy, Epistolary
Language:
hi
Published:
2026-05-03
Content rating:
G

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