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बंद लिफाफों की बस्ती
About this book
कबीर नई दिल्ली के एक पुराने डाकघर में मामूली क्लर्क है जो लंगड़ाकर चलता है और लावारिस पत्रों को छांटने का काम करता है। एक दिन उसे एक ऐसा गुमनाम पत्र मिलता है जो उसके अपने ही भविष्य से लिखा गया प्रतीत होता है। यह पत्र उसे एक ऐसी यात्रा पर ले जाता है जहाँ पत्रों, डायरी के पन्नों, ईमेल और सरकारी मेमो के माध्यम से कई अजनबियों की जिंदगियां आपस में जुड़ती हैं। सान्या नाम की एक संघर्षरत पत्रकार शहर के गुमशुदा लोगों की कहानी खोज रही है, जबकि एक भ्रष्ट पोस्टमास्टर माथुर अपने काले कारनामों को छिपाने की कोशिश में है। देव, एक निराश चित्रकार, अपनी खोई हुई पहचान की तलाश में है। जैसे-जैसे कबीर इन बिखरे हुए पन्नों को जोड़ता है, उसे मानवीय स्वभाव और स्वयं की पहचान के गहरे सच का पता चलता है। कहानी एक पूर्ण चक्र बनाते हुए वहीं समाप्त होती है जहाँ से शुरू हुई थी, और कबीर अंततः वह पत्र लिखता है जिसने इस पूरी घटना की शुरुआत की थी।
Book details
- Genres:
- Literary Fiction
- Language:
- hi
- Published:
- 2026-06-24
- Content rating:
- PG-13